KIRAN YA SAAYA ( hindi poem)

sima sach
sima sach / Blog / 7 yrs ago /
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 किरण या साया

आज पहली बार
मैने देखा ध्यान से
अपने आगे चलती परछाई को
तो मन में सोचा
ये काला साया
क्यों मेरे रास्ते में आया ?
क्या  ये अंधेरे की भाँति,
सदा रहेगा मेरे सम्मुख?
कभी नहीँ बदलेगा ,
यह अपना रुख़ ?
पीछे से सूर्य की तेज़ किरण
पड़ी मेरे सिर पर
और लगा
दिला रही है  अहसास मुझे
मेरे सिर पर हाथ रख कर
देखो.................
मेरी तरफ देखो
मैं काला साया नहीँ
किरण हूँ रोशनी की
मैं सदा साफ रखूँगी
तुम्हारा मार्ग
अगर देखोगी तुम मेरी तरफ़
मेरे स्वामी....सूर्य की तरफ
................................
.................................
सूर्य तो तुम्हारे सामने
रोशनी ले आएगा
पर ये साया..........
ये साया तुम्हें केवल
अंधेरा ही दिखाएगा
अगर देखोगी तुम साए को
तो..................
रोशनी और अपने बींच
इस अंधेरे को पायोगी
और...............
रोशनी तक कभी नहीँ पहुँच पायोगी
लेकिन..............
अगर मेरी तरफ
अपना मुँह घुमायोगी
तो इसी साए को 
अपने पीछे भागता पायोगी
अब यह तुम सोचो
कि तुम
कुत्ते कि तरह साया चाटोगी
या फिर....................
मेरा साथ चाहोगी
मैं तोड़ा सा हिच किचाई
सोचा????????????
तो समझदारी मुझे
रोशनी की किरण में नज़र आई
बस............
मैने उसी तरफ अपना सिर घुमाया
और तब
उस काले साए को
अपने पीछे आते पाया


sima sach / / 7 yrs ago
sima sach

thnx womanslove  for read my poem and nice comment. have a good day........................seema


sima sach / / 7 yrs ago
sima sach

good morning yash ji............thnx for ur nice comment.........seema


womanslove / / 7 yrs ago
womanslove

beautifully written poetry sima as always.


yash chhabra / / 7 yrs ago
yash chhabra

ek sunder aur vichar prearak kavita..achhi lagi....aap bahut achha likhti hain..likhte rahiye gaa.


sima sach / / 7 yrs ago
sima sach

meri kavita padhane aur comment ke liye dhanayvaad ramesh ji........seema


Ramesh_007 / / 7 yrs ago
Ramesh_007

excellent poem sima.!!